दुरूद शरीफ़ पढ़ने की फ़ज़ीलत
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की फ़ज़ीलत और बरकत
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
दुरूद शरीफ़ पढ़ना मुसलमानों के लिए बहुत बड़ी इबादत है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन शरीफ़ में फ़रमाया कि वह और उसके फ़रिश्ते नबी-ए-करीम ﷺ पर दुरूद भेजते हैं, इसलिए ईमान वालों को भी चाहिए कि वह आप ﷺ पर खूब दुरूद भेजें।
दुरूद शरीफ़ पढ़ने से दिल को सुकून मिलता है, गुनाहों की माफ़ी की उम्मीद होती है और अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है। हदीस शरीफ़ में आता है कि जो शख़्स एक बार दुरूद पढ़ता है, अल्लाह तआला उस पर दस रहमतें नाज़िल फ़रमाता है।
हमें अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दुरूद शरीफ़ पढ़ने की आदत बनानी चाहिए। सुबह-शाम, नमाज़ के बाद और दुआ से पहले दुरूद शरीफ़ पढ़ना बहुत फ़ज़ीलत वाला अमल है।
अल्लाह तआला हमें कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।