biography of tajusharia

Biography of Tajushsharia Akhtar Raza Azhari –episode 1

विलादत ए मुबारक

जानशीन मुफ्ति-ए-आज़म अल्लामा मुफ्ती आल्हाज अश्शाह मुहम्मद अख्तर रजा अजहरी कादरी इब्ने मौलाना मुहम्मद इब्राहीम रजा जीलानी इब्ने हुज्जतुलइस्लाम मौलाना मुहम्मद हामिद रजा इब्ने आला हज़रत इमाम अहमद रजा फाज़िले बरेलवी 25 / फरवरी 1942 ई. को मोहल्ला सौदागिरान बरेली शरीफ में पैदा हुये।

ख़ानदानी पस मन्ज़र:

ताजुश्शरीआ का ख़ानदान अफ़गानिनसल और क़बील-ए-बढ़ेच से तअल्लुक रखता है। मुरिस आला शहज़ादा सईदुल्लाह ख़ाँ कन्दहार हुकूमत अफ़गानिस्तान के वली अहद थे,ख़ान्दानी इख्तिलाफ़ की वजह से कन्दहार को तर्क वतन कर लाहौर आये। यहाँ पर गवर्नर ने आप शीश महल में आप के कियाम का इन्तिज़ाम किया और दरबार मुहम्मद शाह बादशाह देहली को इत्तिलाअ भेजवाई,दरबार से शाही मेहमान नवाज़ी का हुक्म सादिर हुआ। फिर शहज़ादा सईदुल्लाह ख़ाँ ने देहली बादशाह मुहम्मद शाह से जा कर मुलाकात की,आप को बादशाह ने फौज का जनरल बना दिया और आप के साथियों को भी फौज में अच्छी जगह मिल गई। रुहेल खण्ड में कुछ बगावत के आसार नुमाया हुये तो बादशाह ने आप को रुहेलखण्ड की दारुस्सुलतनत बरेली भेज दिया ताकि वहाँ अमन व अमान काइम करें। आप के साहबजादे सआदत यारखाँ दरबार देहली में वज़ीर-ए-मुम्लिकत थे,उनको कलैदी कलमदान मिला था,उनकी अपनी अलाहिदा महर थी। हाफिज़ काज़िम अली ख़ाँ के आहद में मुग़लिया हुकूमत का ज़वाल शुरू हो गया। हर तरफ़ बगावतों का शौर और आज़ादी व ख़ुद मुख़्तारी का ज़ोर था। आप अवध की कमान संभालने पहुँचे। आप के फ़रज़न्द मौलाना शाह रज़ा अली ख़ाँ बरेलवी जिन्होंने 1857 ई. में अहम किरदार अदा किया। अंग्रेज़ ने उनका सर कलम करने के लिए पाँच हज़ार के इनाम का एलान किया था। आप के दो फ़रज़न्द मौलाना मुफ़्ती नकी अली ख़ाँ बरेलवी और दूसरे मौलाना हकीम तकी अली ख़ाँ बरेलवी तवल्लुद हुये, जिन्होंने दर्जनों किताबें लिखीं, मौलाना नकी अली ख़ाँ बरेलवी के तीन फ़रज़न्द तवल्लुद हुये। (1) आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ कादरी फ़ाज़िले बरेलवी (2)मौलाना हसन रज़ा ख़ाँ बरेलवी (3) मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद रज़ा ख़ाँ बरेलवी

तस्मिया ख़्वानी :

जानशीन मुफ्ती-ए-आज़म की उम्र शरीफ़ जब चार साल, चार माह, चार दिन की हुई तो वालिद माजिद मुफ़स्सिरे आज़म हिन्द मौलाना मुहम्मद इब्राहीम रज़ा जीलानी ने तक़रीब बिस्मिल्लाह ख़्वानी मुनअकिद की, और उस में दारुलउलूम मन्ज़रे इस्लाम के जुमला तलबा को दअवत दी। हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़म कुद्दिसा सिर्रहु,ने रस्मे बिस्मिल्लाह अदा कराई। और मुहम्मद नाम पर अक़ीका हुआ। पुकार ने का नाम “मुहम्मद इस्माईल रज़ा” और उर्फ़

मुहम्मद अख्तर रज़ा ताजवीज़ हुआ। हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़म की साहबज़ादी यानी जानशीन मुफ़्ती-ए-आज़म की वालिदा माजिदा ने तालीम का ख़ास ख़याल रखा। चूँकि नाना जान का सहीह जानशीन इसी नवासे को मुस्तकबिल में बनना था, और सारी तवक्कुआत उन्हीं से वाबस्ता थीं। इसी लिए नाना जान हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़म की सह्र आमूज़ दुआये भी आप ही के हक़ में निकलती रहीं।

अल्काब :

जानशीन मुफ़्ती-ए-आज़म ने 1984 ई / 1404 हिजरी में सुराश्टर का दौरा फ़रमाया, वीरावल, पुरबन्दर, जामजोधपुर, ईलटिया, धोराजी, और जीतपुर होते हुये 15 / आगस्त 1984 ई. 1404 हिजरी को अमरीली तशरीफ़ ले गये। वहाँ हज़ारों लोग दाखिले सिलसिला हुये। रात 12 बजे से दो बजे तक जानशीन मुफ़्ती-ए-आज़म की तक़रीर हुई। और 18 अगस्त को जूनागढ़ में बज़्म रज़ा की जानिब से एक जलसा रज़ा मस्जिद में रखा गया। जिस में अमीरे शरीअत हाजी नूर मुहम्मद रज़वी मारफ़ानी ने “ताजुल-इस्लाम” का लक़ब दिया। जिसकी ताईद मुफ़्ती गुजरात मौलाना मुफ़्ती अहमद मियाँ ने आम जलसा में की।

जानशीन मुफ़्ती-ए-आज़म को सदरुलमुफ़्तीन, सनदुल मुफ़्तीन, और फ़क़ीह-ए-इस्लाम का लक़ब 1984 ई. 1404 हिजरी में रामपुर के मशहूर आलिमे दीन हज़रत मौलाना सय्यद मुफ़्ती शाहिद अली रज़वी शैख़ुल हदीसअलजामियातुल इस्लामिया गंज क़दीम रामपुर ने एक आम जलसा में दिया।

फखरे अहले सुन्नत, फ़क़ीहे आज़म और शैख़ुल मुहद्देसीन का लक़ब 14 / शव्वालुलमुकर्रम 1405 हिजरी 1985 ई. को मौलाना हकीम मुज़फ्फर अहमद रज़वी बरकाती दातागंज बदायूं ने दिया। उस के अलावा मसलन ताजुश्शरीआ मरजाउलउलमा वलफुज़ला वग़ैरा, और बहुत से अल्काब उ़लमा व मशाइख़ ने दिए। जिसकी एक तवील फेहरिस्त है जामेअ अजहर मिस्र के शैख़ुलहदीस ने आप को फ़ख़्र अजहर का ख़िताब 2010 को क़ाहिर में मुनअक़िद तक़रीब में दिया।

इंशाअल्लाह अगली पोस्ट मे हुज़ूर ताजूषशारिया के बारे ओर ज्यादा जानेंगे!

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