बतौरे ए’तिराज़ कहना : वोह शख़्स लोगों के साथ कुछ भी करे अल्लाह की तरफ़ से उस को फुल (FULL) आज़ादी है 2 बतौरे ए’ तिराज़ यूं कहना : कभी हम फुलां के साथ थोड़ा कुछ कर लें, अल्लाह हमें फ़ौरन पकड़ लेता है (3 अल्लाह ने हमेशा मेरे दुश्मनों का साथ दिया है ﴾4﴿ हमेशा सब कुछ अल्लाह पर छोड़ कर भी देख लिया कुछ नहीं होता ﴾5﴿ अल्लाह ने मेरी किस्मत अभी तक तो ज़रा अच्छी नहीं बनाई 6 शायद उस के खज़ाने में मेरे लिये कुछ भी नहीं, मेरी दुन्यावी ख़्वाहिशात कभी पूरी नहीं हुईं, ज़िन्दगी भर मेरी कोई दुआ क़बूल नहीं हुई, जिस को चाहा वोह दूर चला गया, हर ख़्वाब मेरा टूटा, तमाम अरमान कुचले गए, अब आप ही बताएं मैं अल्लाह पर कैसे ईमान लाऊं ? ﴾7﴿ एक शख्स ने हमारी नाक में दम कर रखा है, मजे की बात येह है कि अल्लाह भी ऐसों के साथ होता है 8 जिस शख्स ने मुसीबतें पहुंचने पर कहा : ऐ अल्लाह ! तूने माल ले लिया, फुलां चीज़ ले ली,
अब क्या करेगा ? या अब क्या चाहता है ? या अब क्या बाकी रह गया ? येह कौल कुफ़ है 9 जो कहे “अल्लाह ने मेरी बीमारी और बेटे की मशक्कत के बा वुजूद अगर मुझे अज़ाब दिया तो उस ने मुझ पर जुल्म किया।” येह कहना कुफ़ है। )۲۰۹ 10﴾ (البحر الرائق ج٥ ص ﴿ अल्लाह ने हमेशा बुरे लोगों का साथ दिया 11 अल्लाह ने मजबूरों को और परेशान किया है।
तंगदस्ती के बाइस बके जाने वाले कुफ़िय्यात की मिसालें
(12) जो कहे : “ऐ अल्लाह ! मुझे रिज़्क़ दे और मुझ पर तंगदस्ती डाल कर जुल्म न कर ।” ऐसा कहना कुफ़ है। 13﴾ (فتاوى قاضى خان ج ٣ ص ١٤٦٧﴿ बा’ज़ लोग जो इज़ालए क़र्ज़ व तंगदस्ती या दौलत की ज़ियादती के लिये कुफ़्फ़ार के यहां नोकरी की खातिर या वीज़ा फ़ॉर्म पर या किसी तरह की रकम वगैरा की बचत के लिये दर-ख्वास्त पर खुद को ईसाई (क्रिस्चेन), यहूदी, कादियानी या किसी भी काफ़िर व मुरतद गुरौह का “फ़र्द” लिखते या लिखवाते हैं उन पर हुक्मे कुफ़ है 14 किसी से माली मदद की दर-ख्वास्त करते हुए कहना या लिखना कि अगर आप ने काम न कर दिया तो मैं कादियानी या ईसाई (क्रिस्चेन) बन जाऊंगा। ऐसा कहने वाला फ़ौरन काफ़िर हो गया। यहां तक कि अगर कोई कहे कि मैं 100 साल के बा’द काफ़िर हो जाऊंगा वोह अभी से काफ़िर हो गया 15 किसी ने मश्वरा दिया कि काफ़िर हो जाओ तो वोह काफ़िर बने या न बने मश्वरा देने वाले पर हुक्मे कुफ़ है। नीज़ किसी ने कुफ़ बका इस पर राज़ी होने वाले पर भी हुक्मे कुफ़ है, क्यूं कि कुफ़ को पसन्द करना भी कुफ़ है ﴾16﴿ अगर वाकेई अल्लाह होता तो गरीबों का साथ देता, मरूज़ों का सहारा होता ।
ए ‘तिराज़ की सूरत में बके जाने वाले कुफ़िय्यात की मिसालें
﴾17﴿ मुझे नहीं मा’लूम अल्लाह ने जब मुझे दुन्या में कुछ न दिया तो मुझे पैदा ही क्यूं किया ! येह कौल कुफ़ है। )18﴾ مِنْحُ الروض ص ٥٢١﴿ किसी मिस्कीन ने अपनी मोहताजी को देख कर येह कहा: या अल्लाह ! फुलां भी तेरा बन्दा है, उसे तूने कितनी ने’ मतें दे रखी हैं और एक मैं भी तेरा बन्दा हूं मुझे किस कदर रन्जो तकलीफ़ देता है। आख़िर येह क्या इन्साफ है ? )19) (عالمگیری ج ۲ ص ٢٦٢( कहते हैं: अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है, मैं कहता हूं येह सब बक्वास है ﴾20﴿ जिन लोगों को मैं प्यार करता हूं वोह परेशानी में रहते हैं और जो मेरे दुश्मन होते हैं अल्लाह उन को बहुत खुशहाल रखता है ﴾21﴿ काफिरों और मालदारों को राहतें और गरीबों और नादारों पर आफ़तें ! बस जी अल्लाह के घर का तो सारा निज़ाम ही उलटा है ﴾22﴿ अगर किसी ने बीमारी, बे रोज़गारी, गुरबत या किसी मुसीबत की वजह से अल्लाह पर ए’तिराज़ करते हुए कहा : “ऐ मेरे रब ! तू मुझ पर क्यूं जुल्म करता है ? हालां कि मैं ने तो कोई गुनाह किया ही नहीं।” तो वोह काफ़िर है।
